श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 114: युधिष्ठिरका कौशिकी, गंगासागर एवं वैतरणी नदी होते हुए महेन्द्रपर्वतपर गमन  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  3.114.14 
युधिष्ठिर उवाच
उपस्पृश्येह विधिवदस्यां नद्यां तपोबलात्।
मानुषादस्मि विषयादपेत: पश्य लोमश॥ १४॥
 
 
अनुवाद
उस समय युधिष्ठिर बोले, 'लोमशजी! देखिए, वैतरणी नदी में विधिपूर्वक स्नान करने से मुझे आध्यात्मिक शक्ति प्राप्त हुई है, जिसके कारण मैं मानवीय कार्यों से विरक्त हो गया हूँ॥ 14॥
 
At that time Yudhishthira said, 'Lomashaji! See, by bathing in the Vaitarani river in a proper manner, I have acquired spiritual power, due to which I have become detached from human affairs.॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)