श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 114: युधिष्ठिरका कौशिकी, गंगासागर एवं वैतरणी नदी होते हुए महेन्द्रपर्वतपर गमन  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  3.114.11 
अयातयामं सर्वेभ्यो भागेभ्यो भागमुत्तमम्।
देवा: संकल्पयामासुर्भयाद् रुद्रस्य शाश्वतम्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
देवताओं ने रुद्रदेव के भय से उन्हें अन्य सब भागों से भी श्रेष्ठ और अनन्त भाग देने का निश्चय किया॥11॥
 
'The gods, out of fear of Rudradev, resolved to give him a better and eternal portion than all the other portions.' 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)