Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.113.20: गाँव, घोष और पुत्रवधू शांता को अपने पुत्र के वश में आते देखकर उनका महान क्रोध शांत हो गया। युधिष्ठिर! उस समय विभाण्डक ऋषि ने राजा लोमपाद पर बड़ी कृपा की। | mahabharat अध्याय 3.113: ऋष्यशृंगका अंगराज लोमपादके यहाँ जाना, राजाका उन्हें अपनी कन्या देना, राजाद्वारा विभाण्डक मुनिका सत्कार तथा उनपर मुनिका प्रसन्न होना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ग्रामांश्च घोषांश्च सुतस्य दृष्ट्वा
शान्तां च शान्तोऽस्य पर: स कोप:।
चकार तस्यैव परं प्रसादं
विभाण्डको भूमिपतेर्नरेन्द्र॥ २०॥
अनुवाद
गाँव, घोष और पुत्रवधू शांता को अपने पुत्र के वश में आते देखकर उनका महान क्रोध शांत हो गया। युधिष्ठिर! उस समय विभाण्डक ऋषि ने राजा लोमपाद पर बड़ी कृपा की।
On seeing the village, the Ghosh and the daughter-in-law Shanta coming under the control of his son, his great anger was appeased. Yudhishthira! At that time the sage Vibhandak showed great mercy to King Lomapad.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥