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mahabharat 3.113.10: राजा लोमपाद ने विभाण्डक मुनि के एकमात्र पुत्र को महल के अन्दर राजभवन में रखा और देखा कि उसी समय सहसा इन्द्रदेव ने वर्षा आरम्भ कर दी और सारा संसार जल से भर गया॥10॥   |   mahabharat अध्याय 3.113: ऋष्यशृंगका अंगराज लोमपादके यहाँ जाना, राजाका उन्हें अपनी कन्या देना, राजाद्वारा विभाण्डक मुनिका सत्कार तथा उनपर मुनिका प्रसन्न होना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 113: ऋष्यशृंगका अंगराज लोमपादके यहाँ जाना, राजाका उन्हें अपनी कन्या देना, राजाद्वारा विभाण्डक मुनिका सत्कार तथा उनपर मुनिका प्रसन्न होना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  3.113.10 
अन्त:पुरे तं तु निवेश्य राजा
विभाण्डकस्यात्मजमेकपुत्रम्।
ददर्श देवं सहसा प्रवृष्ट-
मापूर्यमाणं च जगज्जलेन॥ १०॥
 
 
अनुवाद
राजा लोमपाद ने विभाण्डक मुनि के एकमात्र पुत्र को महल के अन्दर राजभवन में रखा और देखा कि उसी समय सहसा इन्द्रदेव ने वर्षा आरम्भ कर दी और सारा संसार जल से भर गया॥10॥
 
King Lomapada placed the only son of Vibhandak Muni in the royal residence inside the palace and saw that suddenly at that very moment Lord Indra started raining and the whole world was filled with water. 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)