Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.113.1: विभाण्डक बोले - बेटा! ये राक्षस ही हैं जो इस वन में ऐसे अद्भुत और आकर्षक रूप धारण करके विचरण करते हैं। ये अत्यन्त बलवान हैं, सुन्दर रूप धारण करते हैं और ऋषियों-मुनियों की तपस्या में विघ्न डालने के उपाय सोचते रहते हैं॥1॥ | mahabharat अध्याय 3.113: ऋष्यशृंगका अंगराज लोमपादके यहाँ जाना, राजाका उन्हें अपनी कन्या देना, राजाद्वारा विभाण्डक मुनिका सत्कार तथा उनपर मुनिका प्रसन्न होना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
विभाण्डक उवाच
रक्षांसि चैतानि चरन्ति पुत्र
रूपेण तेनाद्भुतदर्शनेन।
अतुल्यवीर्याण्यभिरूपवन्ति
विघ्नं सदा तपसश्चिन्तयन्ति॥ १॥
अनुवाद
विभाण्डक बोले - बेटा! ये राक्षस ही हैं जो इस वन में ऐसे अद्भुत और आकर्षक रूप धारण करके विचरण करते हैं। ये अत्यन्त बलवान हैं, सुन्दर रूप धारण करते हैं और ऋषियों-मुनियों की तपस्या में विघ्न डालने के उपाय सोचते रहते हैं॥1॥
Vibhandak said - Son! It is the demons who roam around in this forest, assuming such wonderful and attractive forms. They are uniquely powerful and assume beautiful forms, and always think of ways to create obstacles in the penance of sages and saints.॥ 1॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥