Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.112.4: उस ब्रह्मचारी के शरीर का मध्य भाग नाभि के पास बहुत पतला था और उसके नितम्ब अत्यंत मोटे थे। जैसे यह रेशमी करधनी मेरी लंगोटी के नीचे बंधी है, वैसे ही उसकी कमर में भी सोने की करधनी थी, जो वस्त्र के भीतर से चमकती रहती थी॥ 4॥ | mahabharat अध्याय 3.112: ऋष्यशृंगका पिताको अपनी चिन्ताका कारण बताते हुए ब्रह्मचारीरूपधारी वेश्याके स्वरूप और आचरणका वर्णन । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
विलग्नमध्यश्च स नाभिदेशे
कटिश्च तस्यातिकृतप्रमाणा।
तथास्य चीरान्तरत: प्रभाति
हिरण्मयी मेखला मे यथेयम्॥ ४॥
अनुवाद
उस ब्रह्मचारी के शरीर का मध्य भाग नाभि के पास बहुत पतला था और उसके नितम्ब अत्यंत मोटे थे। जैसे यह रेशमी करधनी मेरी लंगोटी के नीचे बंधी है, वैसे ही उसकी कमर में भी सोने की करधनी थी, जो वस्त्र के भीतर से चमकती रहती थी॥ 4॥
The middle portion of the body of that brahmacari near the navel was very thin and his buttocks were extremely fat. Just like this girdle of silk is tied under my loincloth, similarly he also had a gold girdle around his waist which kept shining from inside his clothes.॥ 4॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥