Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.112.11: फल (गेंद) को मारकर वह ऐसे हिलने लगा जैसे कोई वृक्ष वायु के झोंके से हिल रहा हो। हे प्रिये! उस देवपुत्र के समान ब्रह्मचारी को देखते हुए मेरा हृदय अपार प्रेम और आनंद से भर गया और मुझे उसमें आसक्ति हो गई है॥ 11॥ | mahabharat अध्याय 3.112: ऋष्यशृंगका पिताको अपनी चिन्ताका कारण बताते हुए ब्रह्मचारीरूपधारी वेश्याके स्वरूप और आचरणका वर्णन । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
फल (गेंद) को मारकर वह ऐसे हिलने लगा जैसे कोई वृक्ष वायु के झोंके से हिल रहा हो। हे प्रिये! उस देवपुत्र के समान ब्रह्मचारी को देखते हुए मेरा हृदय अपार प्रेम और आनंद से भर गया और मुझे उसमें आसक्ति हो गई है॥ 11॥
After hitting the fruit (ball) he started moving around as if a tree was swaying after being swayed by a gust of wind. O dear! While looking at that brahmacari who was like a son of god, my heart was filled with immense love and joy and I have developed an attachment towards him.॥ 11॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥