Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.112.10: उसके पास एक विचित्र गोलाकार फल (गेंद) था, जिसे वह अपने दाहिने हाथ से मारता था। वह फल (गेंद) पृथ्वी पर जाकर बार-बार ऊपर-नीचे उछलता था; उस समय उसका रूप अद्भुत होता था॥10॥ | mahabharat अध्याय 3.112: ऋष्यशृंगका पिताको अपनी चिन्ताका कारण बताते हुए ब्रह्मचारीरूपधारी वेश्याके स्वरूप और आचरणका वर्णन । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उसके पास एक विचित्र गोलाकार फल (गेंद) था, जिसे वह अपने दाहिने हाथ से मारता था। वह फल (गेंद) पृथ्वी पर जाकर बार-बार ऊपर-नीचे उछलता था; उस समय उसका रूप अद्भुत होता था॥10॥
He had a strange spherical fruit (ball) which he used to hit with his right hand. That fruit (ball) used to go to the earth and bounce up and down again and again; at that time its appearance used to be amazing.॥10॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥