श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 111: वेश्याका ऋष्यशृंगको लुभाना और विभाण्डक मुनिका आश्रमपर आकर अपने पुत्रकी चिन्ताका कारण पूछना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  3.111.9 
ऋष्यशृङ्ग उवाच
ऋद्धॺा भवाञ्‍ज्‍योतिरिव प्रकाशते
मन्ये चाहं त्वामभिवादनीयम्।
पाद्यं वै ते सम्प्रदास्यामि कामाद्
यथाधर्मं फलमूलानि चैव॥ ९॥
 
 
अनुवाद
ऋष्यश्रृंग बोले, "हे ब्रह्मन्! आप अपनी समृद्धि के कारण प्रकाश के समान चमक रहे हैं। मैं आपको पूजनीय मानता हूँ और धर्मानुसार स्वेच्छा से आपको जल, जल तथा फल-मूल अर्पित करता हूँ।"
 
Rishyashringa said, "O Brahman! You are shining like a light due to your prosperity. I consider you worthy of worship and voluntarily offer you water, water, and fruits and roots as per the religion."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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