श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 111: वेश्याका ऋष्यशृंगको लुभाना और विभाण्डक मुनिका आश्रमपर आकर अपने पुत्रकी चिन्ताका कारण पूछना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  3.111.13 
ऋष्यशृङ्ग उवाच
फलानि पक्वानि ददानि तेऽहं
भल्लातकान्यामलकानि चैव।
करूषकाणीङ्गुदधन्वनानि
पिप्पलानां कामकारं कुरुष्व॥ १३॥
 
 
अनुवाद
ऋष्यश्रृंग ने कहा, "हे ब्राह्मण! मैं तुम्हें पके हुए फल दे रहा हूं। ये हैं भिलावा, आंवला, करुषक (फालसा), इंगुद (हिंगोट), धान्वन (धामिन) और पीपल के फल - इन सभी का अपनी इच्छानुसार उपयोग करें। ॥13॥
 
Rishyashringa said, "O Brahman! I am giving you ripe fruits. Here are the fruits of Bhilawa, Amla, Karushak (Phalsa), Ingud (Hingot), Dhanvan (Dhamin) and Peepal - use them all as per your wish. ॥13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)