vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 3: वन पर्व
»
अध्याय 111: वेश्याका ऋष्यशृंगको लुभाना और विभाण्डक मुनिका आश्रमपर आकर अपने पुत्रकी चिन्ताका कारण पूछना
»
श्लोक 12
श्लोक
3.111.12
भवता नाभिवाद्योऽहमभिवाद्यो भवान् मया।
व्रतमेतादृशं ब्रह्मन् परिष्वज्यो भवान् मया॥ १२॥
अनुवाद
मैं आपकी पूजा के योग्य नहीं हूँ। आप ही मेरे लिए पूजनीय हैं। हे ब्रह्मन्! यही मेरा नियम है, जिसके अनुसार मैं आपका आलिंगन करूँ॥12॥
I am not worthy of worship for you. You are the one worthy of worship for me. O Brahman! This is my rule, according to which I should embrace you.॥12॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×