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mahabharat 3.111.1: लोमशजी कहते हैं - भरतनन्दन! उस वेश्या ने राजा की आज्ञा से तथा अपनी बुद्धि से उनके कार्य को सिद्ध करने के लिए नाव पर एक सुन्दर आश्रम बनाया था॥1॥   |   mahabharat अध्याय 3.111: वेश्याका ऋष्यशृंगको लुभाना और विभाण्डक मुनिका आश्रमपर आकर अपने पुत्रकी चिन्ताका कारण पूछना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 111: वेश्याका ऋष्यशृंगको लुभाना और विभाण्डक मुनिका आश्रमपर आकर अपने पुत्रकी चिन्ताका कारण पूछना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  3.111.1 
लोमश उवाच
सा तु नाव्याश्रमं चक्रे राजकार्यार्थसिद्धये।
संदेशाच्चैव नृपते: स्वबुद्धॺा चैव भारत॥ १॥
 
 
अनुवाद
लोमशजी कहते हैं - भरतनन्दन! उस वेश्या ने राजा की आज्ञा से तथा अपनी बुद्धि से उनके कार्य को सिद्ध करने के लिए नाव पर एक सुन्दर आश्रम बनाया था॥1॥
 
Lomasha says - Bharatanandan! That prostitute built a beautiful hermitage on the boat as per the king's orders and with her intelligence also to accomplish his task. ॥1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)