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mahabharat 3.110.8: प्राचीन काल में, इस ऋषिभकुट पर ऋषभ नामक एक ऋषि रहते थे। उनकी आयु कई सौ वर्ष थी। तपस्वी होने के साथ-साथ, वे अत्यंत क्रोधी भी थे।   |   mahabharat अध्याय 3.110: नन्दा तथा कौशिकीका माहात्म्य, ऋष्यशृंग मुनिका उपाख्यान और उनको अपने राज्यमें लानेके लिये राजा लोमपादका प्रयत्न   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 110: नन्दा तथा कौशिकीका माहात्म्य, ऋष्यशृंग मुनिका उपाख्यान और उनको अपने राज्यमें लानेके लिये राजा लोमपादका प्रयत्न  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  3.110.8 
अस्मिन्नृषभकूटेऽभूदृषभो नाम तापस:।
अनेकशतवर्षायुस्तपस्वी कोपनो भृशम्॥ ८॥
 
 
अनुवाद
प्राचीन काल में, इस ऋषिभकुट पर ऋषभ नामक एक ऋषि रहते थे। उनकी आयु कई सौ वर्ष थी। तपस्वी होने के साथ-साथ, वे अत्यंत क्रोधी भी थे।
 
In the past, a sage known as Rishabha lived on this Rishibhakut. He was several hundred years old. Apart from being an ascetic, he was also very short-tempered.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)