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mahabharat 3.110.7: तब लोमशजी बोले - शत्रुसूदन! मैंने पूर्वकाल में जो सुना है, वह मैं तुमसे कह रहा हूँ। तुम एकाग्रचित्त होकर मुझसे रहस्य की बात सुनो।   |   mahabharat अध्याय 3.110: नन्दा तथा कौशिकीका माहात्म्य, ऋष्यशृंग मुनिका उपाख्यान और उनको अपने राज्यमें लानेके लिये राजा लोमपादका प्रयत्न   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 110: नन्दा तथा कौशिकीका माहात्म्य, ऋष्यशृंग मुनिका उपाख्यान और उनको अपने राज्यमें लानेके लिये राजा लोमपादका प्रयत्न  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  3.110.7 
लोमश उवाच
यथाश्रुतमिदं पूर्वमस्माभिररिकर्शन।
तदेकाग्रमना राजन्निबोध गदतो मम॥ ७॥
 
 
अनुवाद
तब लोमशजी बोले - शत्रुसूदन! मैंने पूर्वकाल में जो सुना है, वह मैं तुमसे कह रहा हूँ। तुम एकाग्रचित्त होकर मुझसे रहस्य की बात सुनो।
 
Then Lomashji said - Shatrusudan! I am telling you what I have heard in the past. You be focused and listen to the secret from me.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)