Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.110.56-57: ‘महाराज! मैं उस तपस्वी ऋषिपुत्र को लाने का प्रयत्न करूँगी; किन्तु कृपया मुझे यह आदेश दीजिए कि मैं इसके लिए इच्छित व्यवस्था कर सकूँ। यदि मेरी इच्छा पूर्ण हुई तो मैं ऋषिपुत्र ऋष्यश्रृंग को यहाँ ला सकूँगी।’ राजा ने उसकी इच्छानुसार व्यवस्था करने का आदेश दिया। 56-57 | mahabharat अध्याय 3.110: नन्दा तथा कौशिकीका माहात्म्य, ऋष्यशृंग मुनिका उपाख्यान और उनको अपने राज्यमें लानेके लिये राजा लोमपादका प्रयत्न । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
प्रयतिष्ये महाराज तमानेतुं तपोधनम्।
अभिप्रेतांस्तु मे कामांस्त्वमनुज्ञातुमर्हसि॥ ५६॥
तत: शक्ष्याम्यानयितुमृष्यशृङ्गमृषे: सुतम्।
तस्या: सर्वमभिप्रेतमन्वजानात् स पार्थिव:॥ ५७॥
अनुवाद
‘महाराज! मैं उस तपस्वी ऋषिपुत्र को लाने का प्रयत्न करूँगी; किन्तु कृपया मुझे यह आदेश दीजिए कि मैं इसके लिए इच्छित व्यवस्था कर सकूँ। यदि मेरी इच्छा पूर्ण हुई तो मैं ऋषिपुत्र ऋष्यश्रृंग को यहाँ ला सकूँगी।’ राजा ने उसकी इच्छानुसार व्यवस्था करने का आदेश दिया। 56-57
‘Maharaj! I will try to bring that ascetic sage’s son; but please give me this order so that I can make the desired arrangement for this. If my wish is fulfilled then I will be able to bring sage’s son Rishyashringa here.’ The king gave the order to make the arrangement as per her wish. 56-57.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥