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mahabharat 3.110.49: 'हे राजन! यह सुनकर राजा लोमपाद अपने अपराध का प्रायश्चित करके ब्राह्मणों के पास गए और उनके प्रसन्न होने पर वे अपनी राजधानी को लौट आए।'   |   mahabharat अध्याय 3.110: नन्दा तथा कौशिकीका माहात्म्य, ऋष्यशृंग मुनिका उपाख्यान और उनको अपने राज्यमें लानेके लिये राजा लोमपादका प्रयत्न   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 110: नन्दा तथा कौशिकीका माहात्म्य, ऋष्यशृंग मुनिका उपाख्यान और उनको अपने राज्यमें लानेके लिये राजा लोमपादका प्रयत्न  »  श्लोक 49
 
 
श्लोक  3.110.49 
एतच्छ्रुत्वा वचो राजन् कृत्वा निष्कृतिमात्मन:।
स गत्वा पुनरागच्छत् प्रसन्नेषु द्विजातिषु॥ ४९॥
 
 
अनुवाद
'हे राजन! यह सुनकर राजा लोमपाद अपने अपराध का प्रायश्चित करके ब्राह्मणों के पास गए और उनके प्रसन्न होने पर वे अपनी राजधानी को लौट आए।'
 
'O King! On hearing this, King Lomapada atoned for his crime and went to the Brahmins and when they became pleased, he returned to his capital.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)