Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.110.47-48: 'राजन्! हम आपको यह भी सलाह देते हैं कि आप महर्षि विभाण्डक के पुत्र वनवासी ऋष्यश्रृंग को अपने राज्य में बुलाएँ। वे स्त्रियों से सर्वथा अपरिचित हैं और सदा सरल आचरण करने में तत्पर रहते हैं। महाराज! यदि वे महातपस्वी ऋष्यश्रृंग आपके राज्य में आएँ, तो मुझे इसमें कोई संदेह नहीं कि मेघ तुरन्त ही वर्षा करेंगे।'॥47-48॥ | mahabharat अध्याय 3.110: नन्दा तथा कौशिकीका माहात्म्य, ऋष्यशृंग मुनिका उपाख्यान और उनको अपने राज्यमें लानेके लिये राजा लोमपादका प्रयत्न । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ऋष्यशृङ्गं मुनिसुतमानयस्व च पार्थिव।
वानेयमनभिज्ञं च नारीणामार्जवे रतम्॥ ४७॥
स चेदवतरेद् राजन् विषयं ते महातपा:।
सद्य: प्रवर्षेत् पर्जन्य इति मे नात्र संशय:॥ ४८॥
अनुवाद
'राजन्! हम आपको यह भी सलाह देते हैं कि आप महर्षि विभाण्डक के पुत्र वनवासी ऋष्यश्रृंग को अपने राज्य में बुलाएँ। वे स्त्रियों से सर्वथा अपरिचित हैं और सदा सरल आचरण करने में तत्पर रहते हैं। महाराज! यदि वे महातपस्वी ऋष्यश्रृंग आपके राज्य में आएँ, तो मुझे इसमें कोई संदेह नहीं कि मेघ तुरन्त ही वर्षा करेंगे।'॥47-48॥
‘King! We also advise you to call the forest dweller Rishyashringa, son of Maharishi Vibhandak, to your kingdom. He is completely unfamiliar with women and is always ready to behave in a simple manner. Maharaj! If that great ascetic Rishyashringa enters your kingdom, I have no doubt that the clouds will rain immediately.'॥ 47-48॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥