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mahabharat 3.110.46: उन ब्राह्मणों में एक महान ऋषि भी थे। उन्होंने राजा से कहा - 'राजन! ब्राह्मण आपसे रुष्ट हैं; आपको इसका प्रायश्चित करना चाहिए।'॥46॥   |   mahabharat अध्याय 3.110: नन्दा तथा कौशिकीका माहात्म्य, ऋष्यशृंग मुनिका उपाख्यान और उनको अपने राज्यमें लानेके लिये राजा लोमपादका प्रयत्न   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 110: नन्दा तथा कौशिकीका माहात्म्य, ऋष्यशृंग मुनिका उपाख्यान और उनको अपने राज्यमें लानेके लिये राजा लोमपादका प्रयत्न  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक  3.110.46 
तत्र त्वेको मुनिवरस्तं राजानमुवाच ह।
कुपितास्तव राजेन्द्र ब्राह्मणा निष्कृतिं चर॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
उन ब्राह्मणों में एक महान ऋषि भी थे। उन्होंने राजा से कहा - 'राजन! ब्राह्मण आपसे रुष्ट हैं; आपको इसका प्रायश्चित करना चाहिए।'॥46॥
 
Among those Brahmins there was a great sage. He said to the king - 'King! The Brahmins are angry with you; you must do penance for this.'॥ 46॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)