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mahabharat 3.110.45: "हे ब्राह्मणो! बादलों से वर्षा कराने का कोई उपाय सोचो।" उनके पूछने पर ऋषियों और मुनियों ने अपना-अपना मत बताया ॥45॥   |   mahabharat अध्याय 3.110: नन्दा तथा कौशिकीका माहात्म्य, ऋष्यशृंग मुनिका उपाख्यान और उनको अपने राज्यमें लानेके लिये राजा लोमपादका प्रयत्न   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 110: नन्दा तथा कौशिकीका माहात्म्य, ऋष्यशृंग मुनिका उपाख्यान और उनको अपने राज्यमें लानेके लिये राजा लोमपादका प्रयत्न  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  3.110.45 
कथं प्रवर्षेत् पर्जन्य उपाय: परिदृश्यताम्।
तमूचुश्चोदितास्ते तु स्वमतानि मनीषिण:॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
"हे ब्राह्मणो! बादलों से वर्षा कराने का कोई उपाय सोचो।" उनके पूछने पर ऋषियों और मुनियों ने अपना-अपना मत बताया ॥45॥
 
"O Brahmins! Think of a way to make the clouds rain." On their question, the wise men and sages gave their respective opinions. ॥ 45॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)