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mahabharat 3.110.44: युधिष्ठिर! तब राजा ने तपस्वी, बुद्धिमान और इन्द्र से वर्षा कराने में समर्थ ब्राह्मणों को बुलाकर इस समस्या का समाधान पूछा॥44॥   |   mahabharat अध्याय 3.110: नन्दा तथा कौशिकीका माहात्म्य, ऋष्यशृंग मुनिका उपाख्यान और उनको अपने राज्यमें लानेके लिये राजा लोमपादका प्रयत्न   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 110: नन्दा तथा कौशिकीका माहात्म्य, ऋष्यशृंग मुनिका उपाख्यान और उनको अपने राज्यमें लानेके लिये राजा लोमपादका प्रयत्न  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  3.110.44 
स ब्राह्मणान् पर्यपृच्छत् तपोयुक्तान् मनीषिण:।
प्रवर्षणे सुरेन्द्रस्य समर्थान् पृथिवीपते॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर! तब राजा ने तपस्वी, बुद्धिमान और इन्द्र से वर्षा कराने में समर्थ ब्राह्मणों को बुलाकर इस समस्या का समाधान पूछा॥44॥
 
Yudhisthira! Then the king called the Brahmins who were ascetic, intelligent and capable of making rains from Indra and asked for a solution to this problem. 44॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)