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mahabharat 3.110.35-38: राजा! एक दिन जब वे जल में स्नान कर रहे थे, तब उर्वशी अप्सरा को देखकर उनका वीर्य स्खलित हो गया। उस समय प्यास से व्याकुल एक हिरणी वहाँ आई और उसने जल के साथ वीर्य भी पी लिया। इससे वह गर्भवती हो गई। पूर्वजन्म में वह एक दिव्य कन्या थी। सृष्टि के रचयिता भगवान ब्रह्मा ने उसे वचन दिया था कि हिरणी बनकर ऋषि को जन्म देने पर वह उस गर्भ से मुक्त हो जाएगी। ब्रह्मा के वचन अचूक होते हैं और देवताओं के विधान को कोई टाल नहीं सकता, इसीलिए विभाण्डक के पुत्र महर्षि ऋष्यश्रृंग ने हिरणी के गर्भ से जन्म लिया। वे सदैव वन में रहकर तपस्या में लीन रहते थे। 35-38।   |   mahabharat अध्याय 3.110: नन्दा तथा कौशिकीका माहात्म्य, ऋष्यशृंग मुनिका उपाख्यान और उनको अपने राज्यमें लानेके लिये राजा लोमपादका प्रयत्न   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 110: नन्दा तथा कौशिकीका माहात्म्य, ऋष्यशृंग मुनिका उपाख्यान और उनको अपने राज्यमें लानेके लिये राजा लोमपादका प्रयत्न  »  श्लोक 35-38
 
 
श्लोक  3.110.35-38 
तस्य रेत: प्रचस्कन्द दृष्ट्वाप्सरसमुर्वशीम्।
अप्सूपस्पृशतो राजन् मृगी तच्चापिबत् तदा॥ ३५॥
सह तोयेन तृषिता गर्भिणी चाभवत् तत:।
सा पुरोक्ता भगवता ब्रह्मणा लोककर्तृणा॥ ३६॥
देवकन्या मृगी भूत्वा मुनिं सूय विमोक्ष्यसे।
अमोघत्वाद् विधेश्चैव भावित्वाद् दैवनिर्मितात्॥ ३७॥
तस्यां मृग्यां समभवत् तस्य पुत्रो महानृषि:।
ऋष्यशृङ्गस्तपोनित्यो वन एवाभ्यवर्तत॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
राजा! एक दिन जब वे जल में स्नान कर रहे थे, तब उर्वशी अप्सरा को देखकर उनका वीर्य स्खलित हो गया। उस समय प्यास से व्याकुल एक हिरणी वहाँ आई और उसने जल के साथ वीर्य भी पी लिया। इससे वह गर्भवती हो गई। पूर्वजन्म में वह एक दिव्य कन्या थी। सृष्टि के रचयिता भगवान ब्रह्मा ने उसे वचन दिया था कि हिरणी बनकर ऋषि को जन्म देने पर वह उस गर्भ से मुक्त हो जाएगी। ब्रह्मा के वचन अचूक होते हैं और देवताओं के विधान को कोई टाल नहीं सकता, इसीलिए विभाण्डक के पुत्र महर्षि ऋष्यश्रृंग ने हिरणी के गर्भ से जन्म लिया। वे सदैव वन में रहकर तपस्या में लीन रहते थे। 35-38।
 
King! One day when he was bathing in water, his semen was ejaculated on seeing Urvashi Apsara. At that time a deer, distressed by thirst, came there and drank the semen along with the water. Due to this she became pregnant. She was a celestial maiden in her previous birth. Lord Brahma, the creator of the world, had promised her that she would be freed from that womb after becoming a deer and giving birth to a sage. Brahma's words are infallible and no one can avert the law of the gods, that is why Vibhandak's son Maharishi Rishyashringa was born from the womb of a deer. He always lived in the forest, engaged in penance. 35-38.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)