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mahabharat 3.110.34: कश्यप वंश के विभाण्डक ऋषि देवताओं के समान सुन्दर थे। वे एक बहुत बड़े तालाब में प्रवेश करके तपस्या करने लगे। उन्होंने बहुत समय तक महान कष्ट सहन किया॥ 34॥   |   mahabharat अध्याय 3.110: नन्दा तथा कौशिकीका माहात्म्य, ऋष्यशृंग मुनिका उपाख्यान और उनको अपने राज्यमें लानेके लिये राजा लोमपादका प्रयत्न   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 110: नन्दा तथा कौशिकीका माहात्म्य, ऋष्यशृंग मुनिका उपाख्यान और उनको अपने राज्यमें लानेके लिये राजा लोमपादका प्रयत्न  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  3.110.34 
महाह्रद समासाद्य काश्यपस्तपसि स्थित:।
दीर्घकालं परिश्रान्त ऋषि: स देवसम्मित:॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
कश्यप वंश के विभाण्डक ऋषि देवताओं के समान सुन्दर थे। वे एक बहुत बड़े तालाब में प्रवेश करके तपस्या करने लगे। उन्होंने बहुत समय तक महान कष्ट सहन किया॥ 34॥
 
Sage Vibhandak belonging to Kashyap lineage was as beautiful as the gods. He entered a very big pond and started performing penance. He endured great suffering for a long time.॥ 34॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)