Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.110.32-33: लोमशजी बोले- हे राजन! ब्रह्मर्षि विभाण्डक का हृदय तपस्या से पवित्र हो गया था। वे प्रजापति के समान तेजस्वी और अमोघ पराक्रमी थे। मैं तुम्हें बताता हूँ कि उनके प्रतापी पुत्र ऋष्यश्रृंग का जन्म किस प्रकार हुआ। सुनो। जिस प्रकार विभाण्डक मुनि परम पूजनीय थे, उसी प्रकार उनका पुत्र भी अत्यंत तेजस्वी था। बचपन में ही बड़े-बुजुर्ग उनका आदर करते थे। | mahabharat अध्याय 3.110: नन्दा तथा कौशिकीका माहात्म्य, ऋष्यशृंग मुनिका उपाख्यान और उनको अपने राज्यमें लानेके लिये राजा लोमपादका प्रयत्न । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
लोमशजी बोले- हे राजन! ब्रह्मर्षि विभाण्डक का हृदय तपस्या से पवित्र हो गया था। वे प्रजापति के समान तेजस्वी और अमोघ पराक्रमी थे। मैं तुम्हें बताता हूँ कि उनके प्रतापी पुत्र ऋष्यश्रृंग का जन्म किस प्रकार हुआ। सुनो। जिस प्रकार विभाण्डक मुनि परम पूजनीय थे, उसी प्रकार उनका पुत्र भी अत्यंत तेजस्वी था। बचपन में ही बड़े-बुजुर्ग उनका आदर करते थे।
Lomashji said- O King! The heart of Brahmarshi Vibhandak had become pure by penance. He was as radiant as Prajapati and had unfailing valour. I will tell you how his glorious son Rishyashringa was born. Listen. Just as Vibhandak Muni was highly revered, his son too was very radiant. He was respected by elders even in his childhood.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥