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mahabharat 3.110.31: हे प्रभु! ये सब बातें विस्तारपूर्वक और यथार्थ रूप से कहिए। मैं महर्षि ऋष्यश्रृंग का चरित्र सुनना चाहता हूँ। 31॥   |   mahabharat अध्याय 3.110: नन्दा तथा कौशिकीका माहात्म्य, ऋष्यशृंग मुनिका उपाख्यान और उनको अपने राज्यमें लानेके लिये राजा लोमपादका प्रयत्न   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 110: नन्दा तथा कौशिकीका माहात्म्य, ऋष्यशृंग मुनिका उपाख्यान और उनको अपने राज्यमें लानेके लिये राजा लोमपादका प्रयत्न  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  3.110.31 
एतन्मे भगवन् सर्वं विस्तरेण यथातथम्।
वक्तुमर्हसि शुश्रूषोर्ऋष्यशृङ्गस्य चेष्टितम्॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
हे प्रभु! ये सब बातें विस्तारपूर्वक और यथार्थ रूप से कहिए। मैं महर्षि ऋष्यश्रृंग का चरित्र सुनना चाहता हूँ। 31॥
 
Lord! Tell all these things in detail and accurately. I want to listen to the character of Maharishi Rishya Shringa. 31॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)