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mahabharat 3.110.29-30: शांता कैसी राजकुमारी थी जो नियम और व्रत का पालन करती थी और जिसने मृगरूपी ऋषि को भी मोहित कर लिया था । राजा लोमपाद बड़े धर्मात्मा माने जाते थे, फिर भी इन्द्र ने उनके राज्य में वर्षा क्यों नहीं की ?॥29-30॥   |   mahabharat अध्याय 3.110: नन्दा तथा कौशिकीका माहात्म्य, ऋष्यशृंग मुनिका उपाख्यान और उनको अपने राज्यमें लानेके लिये राजा लोमपादका प्रयत्न   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 110: नन्दा तथा कौशिकीका माहात्म्य, ऋष्यशृंग मुनिका उपाख्यान और उनको अपने राज्यमें लानेके लिये राजा लोमपादका प्रयत्न  »  श्लोक 29-30
 
 
श्लोक  3.110.29-30 
कथंरूपा च सा शान्ता राजपुत्री यतव्रता।
लोभयामास या चेतो मृगभूतस्य तस्य वै॥ २९॥
लोमपादश्च राजर्षिर्यदाश्रूयत धार्मिक:।
कथं वै विषये तस्य नावर्षत् पाकशासन:॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
शांता कैसी राजकुमारी थी जो नियम और व्रत का पालन करती थी और जिसने मृगरूपी ऋषि को भी मोहित कर लिया था । राजा लोमपाद बड़े धर्मात्मा माने जाते थे, फिर भी इन्द्र ने उनके राज्य में वर्षा क्यों नहीं की ?॥29-30॥
 
What a princess Shanta was who followed rules and fasts and who even charmed the sage in the form of a deer. King Lomapada was considered a very pious person, then why did Indra not rain in his kingdom?॥ 29-30॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)