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mahabharat 3.110.26: जब वर्षा के कारण फसलें फलने-फूलने लगीं, तब राजा लोमपाद ने अपनी पुत्री शांता का विवाह ऋष्यश्रृंग से कर दिया; जैसे सूर्यदेव ने अपनी पुत्री सावित्री का विवाह ब्रह्माजी से किया था॥ 26॥   |   mahabharat अध्याय 3.110: नन्दा तथा कौशिकीका माहात्म्य, ऋष्यशृंग मुनिका उपाख्यान और उनको अपने राज्यमें लानेके लिये राजा लोमपादका प्रयत्न   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 110: नन्दा तथा कौशिकीका माहात्म्य, ऋष्यशृंग मुनिका उपाख्यान और उनको अपने राज्यमें लानेके लिये राजा लोमपादका प्रयत्न  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  3.110.26 
निर्वर्तितेषु सस्येषु यस्मै शान्तां ददौ नृप:।
लोमपादो दुहितरं सावित्रीं सविता यथा॥ २६॥
 
 
अनुवाद
जब वर्षा के कारण फसलें फलने-फूलने लगीं, तब राजा लोमपाद ने अपनी पुत्री शांता का विवाह ऋष्यश्रृंग से कर दिया; जैसे सूर्यदेव ने अपनी पुत्री सावित्री का विवाह ब्रह्माजी से किया था॥ 26॥
 
When the crops flourished due to the rains, King Lomapada married his daughter Shanta to Rishyashringa; just as the Sun God had married his daughter Savitri to Lord Brahma.॥ 26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)