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mahabharat 3.110.22: वहाँ लोमश ने कहा, 'हे भरतश्रेष्ठ! यह देवताओं की पवित्र नदी कौशिकी है और यह विश्वामित्र का सुन्दर आश्रम है, जो यहाँ शोभायमान है।   |   mahabharat अध्याय 3.110: नन्दा तथा कौशिकीका माहात्म्य, ऋष्यशृंग मुनिका उपाख्यान और उनको अपने राज्यमें लानेके लिये राजा लोमपादका प्रयत्न   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 110: नन्दा तथा कौशिकीका माहात्म्य, ऋष्यशृंग मुनिका उपाख्यान और उनको अपने राज्यमें लानेके लिये राजा लोमपादका प्रयत्न  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  3.110.22 
लोमश उवाच
एषा देवनदी पुण्या कौशिकी भरतर्षभ।
विश्वामित्राश्रमो रम्य एष चात्र प्रकाशते॥ २२॥
 
 
अनुवाद
वहाँ लोमश ने कहा, 'हे भरतश्रेष्ठ! यह देवताओं की पवित्र नदी कौशिकी है और यह विश्वामित्र का सुन्दर आश्रम है, जो यहाँ शोभायमान है।
 
There Lomasha said, 'O best of the Bharatas! This is the holy river Kaushiki, the river of the gods, and this is the beautiful hermitage of Vishwamitra, which is shining here.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)