Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.110.21: वैशम्पायनजी कहते हैं - तत्पश्चात राजा युधिष्ठिर अपने दल के साथ नन्दा में स्नान करके सुखदायक एवं शीतल जल वाली शुभ एवं पुण्यमयी कौशिकी के तट पर गये।   |   mahabharat अध्याय 3.110: नन्दा तथा कौशिकीका माहात्म्य, ऋष्यशृंग मुनिका उपाख्यान और उनको अपने राज्यमें लानेके लिये राजा लोमपादका प्रयत्न   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 110: नन्दा तथा कौशिकीका माहात्म्य, ऋष्यशृंग मुनिका उपाख्यान और उनको अपने राज्यमें लानेके लिये राजा लोमपादका प्रयत्न  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  3.110.21 
वैशम्पायन उवाच
ततस्तत्र समाप्लुत्य गात्राणि सगणो नृप:।
जगाम कौशिकीं पुण्यां रम्यां शीतजलां शुभाम्॥ २१॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं - तत्पश्चात राजा युधिष्ठिर अपने दल के साथ नन्दा में स्नान करके सुखदायक एवं शीतल जल वाली शुभ एवं पुण्यमयी कौशिकी के तट पर गये।
 
Vaishampayanji says - After that, King Yudhishthir along with his entourage took a dip in Nanda and went to the banks of the auspicious and virtuous Kaushiki with pleasant and cool water.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)