Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.110.2: तत्पश्चात् रोग और शोक से मुक्त होकर राजा युधिष्ठिर हेमकूट पर्वत पर पहुँचे और वहाँ उन्होंने अनेक अकल्पनीय और अद्भुत वस्तुएँ देखीं॥2॥   |   mahabharat अध्याय 3.110: नन्दा तथा कौशिकीका माहात्म्य, ऋष्यशृंग मुनिका उपाख्यान और उनको अपने राज्यमें लानेके लिये राजा लोमपादका प्रयत्न   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 110: नन्दा तथा कौशिकीका माहात्म्य, ऋष्यशृंग मुनिका उपाख्यान और उनको अपने राज्यमें लानेके लिये राजा लोमपादका प्रयत्न  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  3.110.2 
पर्वतं स समासाद्य हेमकूटमनामयम्।
अचिन्त्यानद्‍भुतान् भावान् ददर्श सुबहून्नृप:॥ २॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् रोग और शोक से मुक्त होकर राजा युधिष्ठिर हेमकूट पर्वत पर पहुँचे और वहाँ उन्होंने अनेक अकल्पनीय और अद्भुत वस्तुएँ देखीं॥2॥
 
Thereafter, free from disease and sorrow, King Yudhishthira reached the Hemkuta mountain and saw many unimaginable and wonderful things there.॥2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)