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mahabharat 3.110.13: इन्द्र आदि देवता उसके सामने प्रकट होना नहीं चाहते थे, इसलिए बाधा के रूप में उन्होंने इस पर्वतीय प्रदेश को सामान्य लोगों के लिए दुर्गम बना दिया ॥13॥   |   mahabharat अध्याय 3.110: नन्दा तथा कौशिकीका माहात्म्य, ऋष्यशृंग मुनिका उपाख्यान और उनको अपने राज्यमें लानेके लिये राजा लोमपादका प्रयत्न   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 110: नन्दा तथा कौशिकीका माहात्म्य, ऋष्यशृंग मुनिका उपाख्यान और उनको अपने राज्यमें लानेके लिये राजा लोमपादका प्रयत्न  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  3.110.13 
ते दर्शनं त्वनिच्छन्तो देवा: शक्रपुरोगमा:।
दुर्गं चक्रुरिमं देशं गिरिं प्रत्यूहरूपकम्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
इन्द्र आदि देवता उसके सामने प्रकट होना नहीं चाहते थे, इसलिए बाधा के रूप में उन्होंने इस पर्वतीय प्रदेश को सामान्य लोगों के लिए दुर्गम बना दिया ॥13॥
 
The gods like Indra did not want to appear before him, so as a hindrance they made this mountainous region inaccessible to the common people. ॥13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)