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श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 11: भीमसेनके द्वारा किर्मीरके वधकी कथा  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  3.11.9 
सृजन्तं राक्षसीं मायां महानादनिनादितम्।
मुञ्चन्तं विपुलान्नादान् सतोयमिव तोयदम्॥ ९॥
 
 
अनुवाद
वह भयंकर गर्जना कर रहा था और राक्षसी भ्रम पैदा कर रहा था। वह जल से भरे बादल की तरह ज़ोर से दहाड़ रहा था।
 
He was roaring terribly and creating demonic illusions. He roared loudly like a water-filled cloud.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)