Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.11.8: उसकी आठों दाढ़ें स्पष्ट दिखाई दे रही थीं, आँखें क्रोध से लाल हो रही थीं और बाल ऊपर की ओर उठे हुए, मानो धधक रहे हों। उसे देखकर ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो सूर्य की किरणें, विद्युत् मंडल और सारसों की पंक्तियाँ बादलों की शोभा बढ़ा रही हों। | mahabharat अध्याय 3.11: भीमसेनके द्वारा किर्मीरके वधकी कथा । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उसकी आठों दाढ़ें स्पष्ट दिखाई दे रही थीं, आँखें क्रोध से लाल हो रही थीं और बाल ऊपर की ओर उठे हुए, मानो धधक रहे हों। उसे देखकर ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो सूर्य की किरणें, विद्युत् मंडल और सारसों की पंक्तियाँ बादलों की शोभा बढ़ा रही हों।
His eight molars were clearly visible, his eyes were turning red with anger and his hair were raised upwards and appeared to be blazing. Looking at him it seemed as if the sun's rays, the electric sphere and the rows of cranes were adorning the clouds. 8.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥