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श्लोक 3.11.74  |
तत्राश्रौषमहं चैतत् कर्म भीमस्य भारत।
ब्राह्मणानां कथयतां ये तत्रासन् समागता:॥ ७४॥ |
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| अनुवाद |
| हे भरत! मैंने वन में आये हुए ब्राह्मणों से भीमसेन के इस महान् कार्य का वर्णन सुना। |
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| O Bharata! I heard in the forest from the Brahmins who had come there, the description of this great deed of Bhimasena. |
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