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श्लोक 3.11.66  |
हिडिम्बबकयो: पाप न त्वमश्रुप्रमार्जनम्।
करिष्यसि गतश्चापि यमस्य सदनं प्रति॥ ६६॥ |
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| अनुवाद |
| 'हे पापी! अब तू यमलोक में जाकर भी हिडिम्बा और बकासुर के आँसू नहीं पोंछ सकेगा।'॥66॥ |
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| 'O sinner! Now even if you go to Yamaloka you will not be able to wipe away the tears of Hidimba and Bakasur.'॥ 66॥ |
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