श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 11: भीमसेनके द्वारा किर्मीरके वधकी कथा  »  श्लोक 66
 
 
श्लोक  3.11.66 
हिडिम्बबकयो: पाप न त्वमश्रुप्रमार्जनम्।
करिष्यसि गतश्चापि यमस्य सदनं प्रति॥ ६६॥
 
 
अनुवाद
'हे पापी! अब तू यमलोक में जाकर भी हिडिम्बा और बकासुर के आँसू नहीं पोंछ सकेगा।'॥66॥
 
'O sinner! Now even if you go to Yamaloka you will not be able to wipe away the tears of Hidimba and Bakasur.'॥ 66॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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