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श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 11: भीमसेनके द्वारा किर्मीरके वधकी कथा  »  श्लोक 63
 
 
श्लोक  3.11.63 
तं विषीदन्तमाज्ञाय राक्षसं पाण्डुनन्दन:।
प्रगृह्य तरसा दोर्भ्यां पशुमारममारयत्॥ ६३॥
 
 
अनुवाद
यह जानकर कि राक्षस शोक में डूबा हुआ है, पाण्डवपुत्र भीम ने उसे पशु की भाँति दोनों भुजाओं से जोर-जोर से दबाकर मारना आरम्भ कर दिया।
 
Knowing that the demon was immersed in sorrow, Bhima, son of Pandava, began to kill him like an animal, pressing him violently with both his arms.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)