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श्लोक  3.11.6 
तेषां प्रविशतां तत्र मार्गमावृत्य भारत।
दीप्ताक्षं भीषणं रक्ष: सोल्मुकं प्रत्यपद्यत॥ ६॥
 
 
अनुवाद
भरत! जैसे ही वे उस जंगल में दाखिल हुए, वह राक्षस उनका रास्ता रोककर खड़ा हो गया। उसकी आँखें चमक रही थीं। वह भयानक राक्षस मशाल लेकर आया था।
 
Bhaarat! As soon as they entered that forest, that demon stood blocking their path. His eyes were shining. That terrible demon had come with a torch.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)