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mahabharat 3.11.58-59: युद्ध के समय उन दोनों बलवान योद्धाओं की भुजाओं के घर्षण से बाँसों के टूटने के समान भयंकर ध्वनि हो रही थी। जैसे तेज हवा अपने वेग से वृक्ष को हिला देती है, उसी प्रकार भीमसेन ने बलपूर्वक उछलकर उसकी कमर पकड़ ली और बड़े वेग से उस राक्षस को झुलाने लगे।   |   mahabharat अध्याय 3.11: भीमसेनके द्वारा किर्मीरके वधकी कथा   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 11: भीमसेनके द्वारा किर्मीरके वधकी कथा  »  श्लोक 58-59
 
 
श्लोक  3.11.58-59 
तयोर्भुजविनिष्पेषादुभयोर्बलिनोस्तदा।
शब्द: समभवद् घोरो वेणुस्फोटसमो युधि॥ ५८॥
अथैनमाक्षिप्य बलाद् गृह्य मध्ये वृकोदर:।
धूनयामास वेगेन वायुश्चण्ड इव द्रुमम्॥ ५९॥
 
 
अनुवाद
युद्ध के समय उन दोनों बलवान योद्धाओं की भुजाओं के घर्षण से बाँसों के टूटने के समान भयंकर ध्वनि हो रही थी। जैसे तेज हवा अपने वेग से वृक्ष को हिला देती है, उसी प्रकार भीमसेन ने बलपूर्वक उछलकर उसकी कमर पकड़ ली और बड़े वेग से उस राक्षस को झुलाने लगे।
 
During the fight, the friction between the arms of those two strong warriors was making a terrible sound like the breaking of bamboos. Just as a strong wind shakes a tree with its force, in the same way Bhimasena jumped forcefully and caught hold of his waist and started to swing the demon with great speed. 58-59.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)