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mahabharat 3.11.55: दुर्योधन द्वारा प्राप्त अपमान और बाहुबल के कारण भीमसेन का पराक्रम और अभिमान जागृत हो गया था। इधर द्रौपदी भी प्रेम भरी दृष्टि से उनकी ओर देख रही थी; इसलिए उस युद्ध में उनका उत्साह और भी अधिक बढ़ रहा था ॥ 55॥   |   mahabharat अध्याय 3.11: भीमसेनके द्वारा किर्मीरके वधकी कथा   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 11: भीमसेनके द्वारा किर्मीरके वधकी कथा  »  श्लोक 55
 
 
श्लोक  3.11.55 
दुर्योधननिकाराच्च बाहुवीर्याच्च दर्पित:।
कृष्णानयनदृष्टश्च व्यवर्धत वृकोदर:॥ ५५॥
 
 
अनुवाद
दुर्योधन द्वारा प्राप्त अपमान और बाहुबल के कारण भीमसेन का पराक्रम और अभिमान जागृत हो गया था। इधर द्रौपदी भी प्रेम भरी दृष्टि से उनकी ओर देख रही थी; इसलिए उस युद्ध में उनका उत्साह और भी अधिक बढ़ रहा था ॥ 55॥
 
Bhimasena's bravery and pride were aroused by the insult he received from Duryodhan and his physical strength. Here Draupadi was also looking at him with loving eyes; hence he was getting more and more enthusiastic in that battle. ॥ 55॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)