| श्री महाभारत » पर्व 3: वन पर्व » अध्याय 11: भीमसेनके द्वारा किर्मीरके वधकी कथा » श्लोक 51 |
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| | | | श्लोक 3.11.51  | तत: शिलां समुत्क्षिप्य भीमस्य युधि तिष्ठत:।
प्राहिणोद् राक्षस: क्रुद्धो भीमश्च न चचाल ह॥ ५१॥ | | | | | | अनुवाद | | तदनन्तर उस राक्षस ने क्रोधित होकर एक पत्थर उठाकर युद्ध में खड़े भीमसेन पर फेंका, जिससे भीमसेन अचेत हो गये ॥51॥ | | | | Thereafter, the demon got angry and took a stone and threw it at Bhimasena who was standing in the battle. Bhima became immobile due to his attack. 51॥ | | ✨ ai-generated | | |
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