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श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 11: भीमसेनके द्वारा किर्मीरके वधकी कथा  »  श्लोक 49-50
 
 
श्लोक  3.11.49-50 
मुञ्जवज्जर्जरीभूता बहवस्तत्र पादपा:॥ ४९॥
चीराणीव व्युदस्तानि रेजुस्तत्र महावने।
तद् वृक्षयुद्धमभवन्मुहूर्तं भरतर्षभ।
राक्षसानां च मुख्यस्य नराणामुत्तमस्य च॥ ५०॥
 
 
अनुवाद
उस महान वन में बहुत से वृक्ष घास के समान जीर्ण-शीर्ण हो गए थे। वे फटे हुए चिथड़ों के समान इधर-उधर फैले हुए शोभायमान लग रहे थे। हे भरतश्रेष्ठ! राक्षसराज किर्मीर और पुरुषश्रेष्ठ भीमसेन के बीच वह वृक्षयुद्ध दो घड़ी तक चलता रहा।
 
There in that great forest many trees had become as dilapidated as the grass. They looked beautiful spread here and there like torn rags. O best of the Bharatas! That tree battle between the demon king Kirmir and the best of men, Bhimasena, continued for two hours. 49-50.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)