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mahabharat 3.11.4-5: आधी रात के भयंकर समय में जब भयंकर कर्म करने वाले नरभक्षी राक्षस विचरण करते हैं, तब तपस्वी ऋषिगण और वनवासी ग्वाल-बाल भी उस राक्षस के भय से दूर ही रहते थे। ॥4-5॥   |   mahabharat अध्याय 3.11: भीमसेनके द्वारा किर्मीरके वधकी कथा   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 11: भीमसेनके द्वारा किर्मीरके वधकी कथा  »  श्लोक 4-5
 
 
श्लोक  3.11.4-5 
रात्रौ निशीथे त्वाभीले गतेऽर्धसमये नृप।
प्रचारे पुरुषादानां रक्षसां घोरकर्मणाम्॥ ४॥
तद् वनं तापसा नित्यं गोपाश्च वनचारिण:।
दूरात् परिहरन्ति स्म पुरुषादभयात् किल॥ ५॥
 
 
अनुवाद
आधी रात के भयंकर समय में जब भयंकर कर्म करने वाले नरभक्षी राक्षस विचरण करते हैं, तब तपस्वी ऋषिगण और वनवासी ग्वाल-बाल भी उस राक्षस के भय से दूर ही रहते थे। ॥4-5॥
 
At the dreadful hour of midnight, when cannibalistic demons performing horrible deeds are roaming about, even the ascetic sages and the forest-dwelling cowherds used to avoid the forest from a distance out of fear of that demon. ॥4-5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)