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mahabharat 3.11.37: 'जैसे महर्षि अगस्त्य ने महान् राक्षस वातापि को खाकर पचा दिया था, वैसे ही मैं इस महाबली भीम को मारकर खाकर पचा दूँगा।'॥37॥   |   mahabharat अध्याय 3.11: भीमसेनके द्वारा किर्मीरके वधकी कथा   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 11: भीमसेनके द्वारा किर्मीरके वधकी कथा  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  3.11.37 
एनं हि विपुलप्राणमद्य हत्वा वृकोदरम्।
सम्भक्ष्य जरयिष्यामि यथागस्त्यो महासुरम्॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
'जैसे महर्षि अगस्त्य ने महान् राक्षस वातापि को खाकर पचा दिया था, वैसे ही मैं इस महाबली भीम को मारकर खाकर पचा दूँगा।'॥37॥
 
'Just as the great sage Agastya ate and digested the great demon Vataapi, similarly I will kill and eat and digest this mighty Bhima.'॥ 37॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)