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mahabharat 3.11.35: ‘आज मैं राक्षसों के लिए काँटे के रूप में इस भीमसेन को मारकर अपने भाई और मित्र का ऋण चुकाऊँगा और परम शान्ति प्राप्त करूँगा॥35॥   |   mahabharat अध्याय 3.11: भीमसेनके द्वारा किर्मीरके वधकी कथा   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  3.11.35 
अद्याहमनृणो भूत्वा भ्रातु: सख्युस्तथैव च।
शान्तिं लब्धास्मि परमां हत्वा राक्षसकण्टकम्॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
‘आज मैं राक्षसों के लिए काँटे के रूप में इस भीमसेन को मारकर अपने भाई और मित्र का ऋण चुकाऊँगा और परम शान्ति प्राप्त करूँगा॥35॥
 
'Today, by killing this Bhimasena in the form of a thorn for the demons, I will repay the debt of my brother and friend and attain ultimate peace. 35॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)