श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 11: भीमसेनके द्वारा किर्मीरके वधकी कथा  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  3.11.34 
अद्यास्य यातयिष्यामि तद् वैरं चिरसम्भृतम्।
तर्पयिष्यामि च बकं रुधिरेणास्य भूरिणा॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
‘आज मैं उससे उस पुराने वैर का बदला लूँगा और उसका प्रचुर रक्त बकासुर को अर्पित करूँगा ॥ 34॥
 
‘Today I will take revenge on him for that old enmity and will offer his abundant blood to Bakasura.॥ 34॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd