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श्लोक 3.11.34  |
अद्यास्य यातयिष्यामि तद् वैरं चिरसम्भृतम्।
तर्पयिष्यामि च बकं रुधिरेणास्य भूरिणा॥ ३४॥ |
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| अनुवाद |
| ‘आज मैं उससे उस पुराने वैर का बदला लूँगा और उसका प्रचुर रक्त बकासुर को अर्पित करूँगा ॥ 34॥ |
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| ‘Today I will take revenge on him for that old enmity and will offer his abundant blood to Bakasura.॥ 34॥ |
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