श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 11: भीमसेनके द्वारा किर्मीरके वधकी कथा  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  3.11.28 
विदुर उवाच
किर्मीरस्त्वब्रवीदेनं दिष्टॺा देवैरिदं मम।
उपपादितमद्येह चिरकालान्मनोगतम्॥ २८॥
 
 
अनुवाद
विदुर जी कहते हैं - हे राजन! तब किर्मीर ने युधिष्ठिर से कहा - 'आज सौभाग्य से देवताओं ने मेरी बहुत दिनों की इच्छा पूरी कर दी है।
 
Vidur ji says - O King! Then Kirmir said to Yudhishthir - 'Today fortunately the gods have fulfilled my long standing desire here.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd