श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 11: भीमसेनके द्वारा किर्मीरके वधकी कथा  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  3.11.23 
अहं बकस्य वै भ्राता किर्मीर इति विश्रुत:।
वनेऽस्मिन् काम्यके शून्ये निवसामि गतज्वर:॥ २३॥
 
 
अनुवाद
'मैं बकरे का भाई हूँ, मेरा नाम किरमीर है, मैं इस निर्जन काम्यक वन में रहता हूँ। मुझे यहाँ कोई चिन्ता नहीं है॥ 23॥
 
'I am the brother of Bakra, my name is Kirmir, I live in this deserted Kamyaka forest. I have no worries here.॥ 23॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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