श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 11: भीमसेनके द्वारा किर्मीरके वधकी कथा  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  3.11.2 
विदुर उवाच
शृणु भीमस्य कर्मेदमतिमानुषकर्मण:।
श्रुतपूर्वं मया तेषां कथान्तेषु पुन: पुन:॥ २॥
 
 
अनुवाद
विदुर जी बोले - हे राजन! मानव शक्ति से परे कर्म करने वाले भीमसेन के इस भयंकर कर्म को सुनो, जिसे मैंने पाण्डवों की कथाओं के प्रसंग में (ब्राह्मणों से) बार-बार सुना है।
 
Vidur ji said - O King! Listen to this dreadful deed of Bhimasena, who performed deeds beyond human strength, which I have heard repeatedly (from Brahmins) in the context of the stories of the Pandavas.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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