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श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 11: भीमसेनके द्वारा किर्मीरके वधकी कथा  »  श्लोक 19-21
 
 
श्लोक  3.11.19-21 
अथ तां राक्षसीं मायामुत्थितां घोरदर्शनाम्।
रक्षोघ्नैर्विविधैर्मन्त्रैर्धौम्य: सम्यक्प्रयोजितै:॥ १९॥
पश्यतां पाण्डुपुत्राणां नाशयामास वीर्यवान्।
स नष्टमायोऽतिबल: क्रोधविस्फारितेक्षण:॥ २०॥
काममूर्तिधर: क्रूर: कालकल्पो व्यदृश्यत।
तमुवाच ततो राजा दीर्घप्रज्ञो युधिष्ठिर:॥ २१॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् वहाँ प्रकट हुए अत्यंत भयानक मय दानव को देखकर बलवान ऋषि धौम्य ने पाण्डवों के देखते ही देखते नाना प्रकार के मन्त्रों द्वारा राक्षसों का भलीभाँति नाश कर दिया। माया के नष्ट होते ही इच्छानुसार रूप धारण करने वाला वह अत्यंत बलवान और क्रूर दैत्य क्रोध में आँखें फाड़कर घूरता हुआ मृत्यु के समान देखने लगा। उस समय परम बुद्धिमान राजा युधिष्ठिर ने उससे पूछा -॥19-21॥
 
Thereafter, seeing the extremely terrifying demon Maya that appeared there, the powerful sage Dhoumya destroyed that Maya in front of the Pandavas by using various mantras to destroy the demons very well. As soon as Maya was destroyed, that extremely powerful and cruel demon who could assume any form at will, started looking like death, staring with wide open eyes in anger. At that time, the most intelligent king Yudhishthira asked him -॥19-21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)