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mahabharat 3.11.16: उस पहले से अदृश्य राक्षस के पास पहुँचकर कमल पुष्पों से परिपूर्ण श्रीकृष्ण ने भयभीत होकर अपनी दोनों आँखें बंद कर लीं॥16॥   |   mahabharat अध्याय 3.11: भीमसेनके द्वारा किर्मीरके वधकी कथा   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 11: भीमसेनके द्वारा किर्मीरके वधकी कथा  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  3.11.16 
तं समासाद्य वित्रस्ता कृष्णा कमललोचना।
अदृष्टपूर्वं संत्रासान्न्यमीलयत लोचने॥ १६॥
 
 
अनुवाद
उस पहले से अदृश्य राक्षस के पास पहुँचकर कमल पुष्पों से परिपूर्ण श्रीकृष्ण ने भयभीत होकर अपनी दोनों आँखें बंद कर लीं॥16॥
 
Reaching near that previously unseen demon, Krishna, who was full of lotus flowers, got scared and closed both his eyes. 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)