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mahabharat 3.11.15: दूर से काले मृगचर्म धारण किए पाण्डवों को आते देखकर उसने मैनाक पर्वत के समान वन के प्रवेशद्वार को घेर लिया।   |   mahabharat अध्याय 3.11: भीमसेनके द्वारा किर्मीरके वधकी कथा   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 11: भीमसेनके द्वारा किर्मीरके वधकी कथा  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  3.11.15 
स दृष्ट्वा पाण्डवान् दूरात् कृष्णाजिनसमावृतान्।
आवृणोत् तद्वनद्वारं मैनाक इव पर्वत:॥ १५॥
 
 
अनुवाद
दूर से काले मृगचर्म धारण किए पाण्डवों को आते देखकर उसने मैनाक पर्वत के समान वन के प्रवेशद्वार को घेर लिया।
 
Seeing the Pandavas approaching from a distance wearing black deerskin, he surrounded the entrance of the forest like the Mainak mountain.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)